नोएडा में अवैध निर्माण को देखकर सबसे बड़ा सवाल यही उठता है— आखिर ऐसा क्या है कि नोटिस जारी होते हैं, फाइलें चलती हैं, अधिकारी आते–जाते हैं, लेकिन अवैध निर्माण एक दिन के लिए भी नहीं रुकता।
लगता तो ऐसा है कि क्या भूमाफियाओं के पास कोई ऐसा ताबीज या मंत्र है, जिससे कानून निष्क्रिय हो जाता है, कार्रवाई फाइलों में दब जाती है और अवैध इमारतें सात–सात मंजिल तक खड़ी हो जाती हैं?
अब जनता का मानना है कि
👉इन मंत्रों की काट सिर्फ सीईओ साहब का चाबुक ही कर सकता है।
👉वर्क सर्किल–5: वर्षों से एक ही जगह जमे जेई का दबदबा
👉नोएडा प्राधिकरण के वर्क सर्किल–5 में तैनात
👉जूनियर इंजीनियर नवीन कुमार कई वर्षों से एक ही सर्किल में टिके हुए हैं।
👉लंबी तैनाती के चलते पूरे सर्किल क्षेत्र में उनका खासा दबदबा बताया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार,
यही दबदबा अवैध निर्माण और अवैध कब्जों को खुला संरक्षण देने की वजह बन रहा है।
4 साल पुराना नोटिस, लेकिन 7 मंजिला इमारत तैयार
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि चार साल पहले जिस निर्माण पर नोटिस जारी किया गया, आज उसी स्थान पर सात मंजिला इमारत खड़ी हो चुकी है।
सवाल बिल्कुल साफ है—
जब नोटिस जारी हो चुका था
जब निर्माण अवैध घोषित था
तो चार साल तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
नोटिस का खेल, कार्रवाई शून्य
वर्क सर्किल–5 में कार्रवाई का एक ही पैटर्न दिखाई देता है—
▪️ नोटिस भेजो
▪️ रिकॉर्ड में दिखाओ
▪️ मामला ठंडा होने दो
सूत्रों का दावा है कि
मामूरा ही नहीं, पूरे वर्क सर्किल क्षेत्र में
अवैध इमारतें
सरकारी और प्राधिकरण की जमीन पर कब्जे
इन सभी मामलों में
जेई नवीन कुमार और वर्क सर्किल के कुछ बड़े अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है।
अवैध इमारतें किराए पर, लाखों की वसूली
नोएडा में बिना नक्शा पास कराए, बिना अनुमति
खड़ी की गई बहुमंजिला इमारतों को
किराए पर उठाकर लाखों रुपये की अवैध कमाई की जा रही है।
कोई माफिया अवैध प्लॉटिंग कर रहा है,
तो कोई बिना अनुमति पूरी सोसाइटी खड़ी कर रहा है।
पूरे जनपद में फैला अवैध निर्माण का नेटवर्क
यह समस्या सिर्फ नोएडा तक सीमित नहीं है।
पूरे जनपद में प्राधिकरण के वर्क सर्किल क्षेत्रों में
👉 अधिकारी
👉 कर्मचारी
👉 भूमाफिया
तीनों की सांठगांठ से अवैध निर्माण फल–फूल रहा है।
अब निगाहें सीईओ की सीधी कार्रवाई पर
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों का मानना है कि
यदि सीईओ स्वयं
जमीनी निरीक्षण करें
पुराने नोटिसों की समीक्षा कराएं
वर्षों से एक ही स्थान पर जमे अधिकारियों की भूमिका की जांच कराएं
तो पूरे सिस्टम की असली तस्वीर सामने आ सकती है।
निष्कर्ष
नोएडा में अवैध निर्माण
सिर्फ इमारतों का मामला नहीं है,
बल्कि यह पूरे सिस्टम की ईमानदारी की परीक्षा है।
अब देखना यह है—
क्या भूमाफियाओं का ताबीज चलेगा
या सीईओ साहब का चाबुक?

