नोएडा सेक्टर-150 युवराज हादसा: प्राधिकरण की कार्रवाई पर फिर उठे सवाल
निलंबित अधिकारी आज भी सिस्टम में सक्रिय होने के आरोप
नोएडा के सेक्टर-150 में हुआ युवराज हादसा न सिर्फ नोएडा बल्कि पूरे देश को झकझोर देने वाला मामला था। हादसे के बाद हर ओर युवराज केस की चर्चा थी। प्रशासनिक स्तर पर बड़े-बड़े दावे किए गए, जांच बैठी, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की बातें सामने आईं और यहां तक कि नोएडा प्राधिकरण के तत्कालीन सीईओ को भी पद से हटाकर प्रतीक्षा सूची में डाल दिया गया।
लेकिन अब, इस पूरे मामले में नोएडा प्राधिकरण की कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते नजर आ रहे हैं।
निलंबन सिर्फ कागज़ों और बयान तक सीमित?
सूत्रों के अनुसार, नोएडा प्राधिकरण के पूर्व सीईओ लोकेश एम द्वारा युवराज हादसे में लापरवाही के आरोप में जिस अधिकारी को निलंबित किया गया था, वह अधिकारी आज भी गुपचुप तरीके से प्राधिकरण का कामकाज संभाल रहा है।
बताया जा रहा है कि निलंबन की कार्रवाई सिर्फ मौखिक आदेश और प्रेस विज्ञप्ति तक ही सीमित रह गई थी
सीईओ के हटते ही ठंडे बस्ते में गया मामला
सूत्रों का दावा है कि उक्त अधिकारी के निलंबन के कुछ समय बाद ही तत्कालीन सीईओ लोकेश एम को नोएडा प्राधिकरण से हटा दिया गया। इसके बाद यह पूरा मामला धीरे-धीरे ठंडे बस्ते में चला गया और समय के साथ कार्रवाई की गंभीरता भी कमजोर पड़ती चली गई।
पुलिस ने निभाई जिम्मेदारी, प्राधिकरण पर सवाल
इस बीच नोएडा पुलिस ने अपनी भूमिका निभाते हुए बिल्डर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की। जिम्मेदार लोगों पर मुकदमे दर्ज किए गए और कई दोषियों को जेल भी भेजा गया।
हालांकि, प्राधिकरण स्तर पर जिस अधिकारी की भूमिका को सबसे अधिक संदिग्ध माना गया था, उसके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई न होना अब सवालों के घेरे में है।
सबसे बड़ा सवाल
सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि
जिस अधिकारी की लापरवाही सबसे पहले चिन्हित की गई और जिसे निलंबित किया गया, वह आज भी प्राधिकरण का कामकाज कैसे संभाल रहा है?
सूत्रों का कहना है कि संबंधित अधिकारी फिलहाल “समय आने” का इंतजार कर रहे हैं और भविष्य में एक बार फिर प्राधिकरण में अपने गैर-जिम्मेदाराना रवैये का खुलकर प्रदर्शन कर सकते हैं।
संपत्ति जांच की मांग भी तेज
वहीं, कुछ समाजसेवियों का कहना है कि जल्द ही उक्त अधिकारी की संपत्ति की जांच कराई जानी चाहिए। इस संबंध में शासन को पत्र लिखकर औपचारिक शिकायत और जांच की मांग किए जाने की तैयारी चल रही है।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इस खबर के सामने आने के बाद प्रशासन कब और कैसे कार्रवाई करता है। क्या संबंधित अधिकारी को वास्तव में नोएडा प्राधिकरण से पूरी तरह दूर किया जाएगा, या फिर युवराज हादसे की तरह यह मामला भी फाइलों और बयानों तक ही सीमित रह जाएगा।

